vinod upadhyay

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बुधवार, 2 अप्रैल 2014

हिंदी सीखने में बिजी हैं सनी, कैट, नरगिस

इन दिनों बॉलिवुड की हीरोइनें अपनी हिंदी सुधारने पर जोर दे रही हैं। ये वहीं एक्ट्रेसेज हैं जिन्होंने बाहर से आकर बॉलिवुड में करियर तो बना लिया लेकिन हिंदी नहीं सीखी। सनी लियोनी, नरगिस फाखरी और कैटरीना जैसी हीरोइनें अपनी हिंदी पर काफी मेहनत कर रही हैं। हर से बॉलिवुड में आकर काम करने वाली हीरोइनों को समझ में आ गया है कि यहां काम करना है, तो हिंदी सीखनी ही पड़ेगी। तभी तो इन दिनों सनी लिओनी और नरगिस फ़ाख़री भी हिंदी सीखने में बिज़ी हैं। कोई इसे सीखने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है, तो कोई स्पेशल ट्रेनिंग भी ले रही है। लेकिन सबका मकसद यही है कि जल्द से जल्द इन्हें हिंदी बोलनी आ जाए। इससे ये फिल्म में अपने डायलॉग्स तो अच्छी तरह बोल ही पाएंगी और प्रमोशनल इवेंट के दौरान भी यह हिंदी में आसानी से बात कर पाएंगी। नरगिस को लगता है फन नरगिस फ़ाख़री ने अपने बॉलिवुड करियर की शुरुआत फिल्म 'रॉकस्टार' से की थी। हाफ पाकिस्तानी और हाफ चेक अमेरिकन मॉडल नरगिस को हिंदी बिल्कुल नहीं आती। लेकिन बॉलिवुड में एंट्री करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि यह भाषा आना कितना जरूरी है। इसलिए उन्होंने हिंदी सीखने के लिए क्लासेज लीं। वह कहती हैं, ‘मैं हर रोज हिंदी सीख रही हूं। जितना काम कर सकती हूं इस लैंग्वेज, पर उतना कर रही हूं। मैंने हिंदी पढ़ना और लिखना दोनों ही सीखा है। बहुत मज़ा आ रहा है मुझे यह सीखने में। मैं बिना सबटाइटल वाली हिंदी फिल्में देखती हूं , ताकि अच्छी तरह सीख सकूं। मैंने करीब एक साल पहले हिंदी की क्लासेज लेनी शुरू की थी। हालांकि, अब भी मैं हिंदी में जोक्स नहीं समझ पाती मगर कोई मुझसे हिंदी में बात करता है, तो मैं समझ जाती हूं।’ कैटरीना का हार्डवर्क लंदन से आईं कैटरीना कैफ ने हिंदी सीखने पर काफी मेहनत की है। हालांकि, अभी भी वह उतनी फ्लुएंट हिंदी नहीं बोल पाती हैं, लेकिन फिल्मों में उनके डिक्शन में काफी सुधार हो चुका है। उन्हें अपने डायलॉग किसी और से डब करवाना बिल्कुल पसंद नहीं है। इसलिए वह हिंदी काफी मेहनत से सीख रही हैं। उन्हें यह भाषा सीखाने वाले डिक्शन ट्यूटर आनंद मिश्रा कहते हैं, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि कैटरीना ने हिंदी सीखने में बहुत मेहनत की है। उन्होंने मुझसे हिंदी सीखना तब शुरू किया था जब वह फिल्म ‘मैंने प्यार क्यों किया’ में काम कर रही थीं। अब भी वह कोई फिल्म करती हैं, तो अपने डायलॉग्स पर बहुत मेहनत करती है।’ आनंद कैटरीना के अलावा एवलिन शर्मा, हेजल कीच, चांदनी परेरा, नरगिस फ़ाख़री और मरियम ज़कारिया को भी हिंदी सीखा चुकी हूं। सनी भी सीख रही हैं कैनेडियन पोर्न स्टार से बॉलिवुड एक्ट्रेस बनी सनी लियोनी भी हिंदी पर काफी मेहनत कर रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें कभी यह पता नहीं था कि वह हिंदी फिल्मों में काम करेंगी। हाल ही में एक टीवी शो में अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए गई सनी एक घंटे पहले ही वहां पहुंच गई। दरअसल, उन्हें शूट के दौरान अपने डायलॉग खुद बोलने थे। वह नहीं चाहती थीं कि उनके डायलॉग कोई और डब करे। यह भाषा सीखने में उन्हें काफी मुश्किल हो रही है, लेकिन सनी इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। ब्रूना, हेज़ल और मरियम भी 'ग्रैंड मस्ती' में काम करने वाली अरब ब्रैजिलियन मॉडल ब्रूना अब्दुल्ला ने तो फिल्म ही तब तक साइन नहीं की थी, जबतक कि उन्होंने हिंदी सीख नहीं ली। यही नहीं, वह इंडियन क्लासिकल डांस की भी ट्रेनिंग ले रही हैं। स्वीडिश-इरानियन मॉडल मरियम जकारिया भी हिंदी की क्लासेज ले रही हैं।

टैलेंट हो तो इंडस्ट्री आपकी

-सिटी लाइव से खास चर्चा में बोले फिल्म एक्टर वत्सल सेठ
इंदौर। स्टार प्लस पर टेलीकास्ट होने वाले सीरियल 'एक हसीना थी' में शौर्य गोयनका का लीड रोल निभाने वाले वत्सल सेठ मंगलवार को शहर आए। इस दौरान सिटी लाइव से खास चर्चा में उन्होंने फिल्म और टेलीविजन के एक्सपीरिएंस शेयर किए। उन्होंने कहा कि एक्टर बनने के बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था। मैं तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता था। 'जस्ट मोहब्बत' सीरियल की टीम में मेरे फ्रैंड की मम्मी थी और उन्होंने बताया कि सीरियल के लिए एक चेहरे की तलाश है। मैंने ऑडिशन दिया और सिलेक्ट हो गया। वत्सल ने कहा कि इस 'एक हसीना थी' की कहानी सास बहू टाइप के सीरियलों से बिल्कुल अलग है। कोलकाता की एक महिला की यह कहानी सिर्फ बदले की कहानी नहीं है। वह अतीत में हुए एक अपराध के लिए इंसाफ की तलाश कर रही है। इसमें शौर्य का किरदार भी कई लोगों को अपने से जुड़ा हुआ लगेगा। फिल्म इंडस्ट्री में मुझे सलमान खान, सोहेल खान और अजय देवगन से बहुत कुछ सीखने को मिला। टेलीविजन से फिल्म तक के सफर में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं यह सीख गया कि सभी के जीवन में अप-डाउन का दौर आता है और इसमें वही बना रहता है, जिसके पास टैलेंट है। सुधार की रहती है गुंजाइश यह इंडस्ट्री ऐसी है जिसमें जितने भी आए सभी का वेलकम है। इससे कॉम्पीटिशन बढ़ता है। इस कॉम्पीटिशन में जो अपडेट रहता है वह बना रहता है। टीवी सीरियल का अच्छा पक्ष यह है कि इसमें सुधार की गुंजाइश रहती है। फिल्म में शूटिंग के बाद कमी या खूबियों का पता फिल्म रिलीज होने के बाद ही चलता है। सीरियलों में हम अमेरिका के पैटर्न को फॉलो कर रहे हैं। डेली सोप के सब्जेक्ट्स में भी काफी बदलाव आ गया है।

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

बिपाशा और मैं सच में एक- दूसरे से बहुत प्यार करते हैं

हरमन बावेजा इंडस्ट्री में अपने टैलंट के दम पर नाम कमाना चाहते हैं। फिलहाल तो बिपाशा और उनके रिलेशन के चर्चे जोरों पर हैं। तो हरमन से ही जानते हैं उनकी हाल में रिलीज हुई मूवी 'ढिश्यक्याऊं' और उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में
कभी लगा नहीं कि 'ढिकिश्याऊं' में सनी जैसे अभिनेता के सामने आप फीके पड़ जाएंगे/
इस बारे में मेरी सोच अलग है। सनी जैसे स्टार के साथ कैमरा फेस करने का मतलब एक्टिंग की पीएचडी करने के बराबर है। सनी सर के साथ अपने पहले सीन की शूटिंग के वक्त मैं बहुत नर्वस था। उस वक्त सनी सर ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए कहा शॉट रेडी है। मेरी आंखों में आंखें देखकर कैमरा फेस करना। सनी सर की यहीं एक टिप ने मेरे अंदर गजब की एनर्जी भर दी। वैसे भी कई बार किसी फिल्म में दो मिनट का सीन भी आपको स्टार बना देता है।
आपके पापा हैरी बावेजा की प्रॉडक्शन कंपनी है, फिर भी कमबैक में इतना वक्त क्यों लग गया आपको/
पापा ने पचास करोड़ में बनी लव स्टोरी 2050 मेरे लिए बनाई। लॉन्च किया। फिल्म नहीं चली, हमें मोटा घाटा हुआ। इसके बावजूद पापा ने अगले साल एक और प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया, तो मैंने उनसे कहा कि अब आप मेरे लिए फिल्म न बनाएं। मुझे अपनी जगह खुद बनाने दीजिए। पापा भी बेहद स्वाभिमानी टाइप के इंसान है, उन्होंने मेरा साथ दिया। करीब छ: साल पहले, जब मेरी पहली फिल्म नहीं चली, तो मेरे ऊपर फ्लॉप का ठप्पा लग गया। ऐसे में मेरे साथ फिल्म बनाना हर किसी के बूते की बात नहीं थी। इस बीच दो फिल्में आईं, लेकिन इस बार भी किस्मत ने धोखा दिया और मैंने ब्रेक लेने का फैसला किया। फ्लॉप से शुरुआत के बाद हालात से कैसे सामना किया/
फैमिली और फ्रेंडस का साथ मिला। इसी इंडस्ट्री में लंबा वक्त गुजार चुके पापा ने समझाया कि अगर कामयाबी पानी है, तो नाकामयाबी से कभी आंखें ना चुराओ। इर फील्ड में हर किसी को कामयाबी और नाकामयाबी से रूबरू होना पड़ता है। इसी का असर था कि मैं इंडस्ट्री से गायब नहीं हुआ। इन हालातों ने मेरे अंदर के छिपे कलाकार को जगा दिया। मुझे लगा कि एक्टिंग मेरा जुनून है। इसी फील्ड में अपनी पहचान बनानी है।
रितिक रोशन से तुलना होने पर कैसा लगता है/
रितिक का मैं जबर्दस्त फैन हूं। पहली फिल्म के बाद से मीडिया में मेरी तुलना रितिक के साथ की जाती है, लेकिन ऐसी तुलना किसी ने मेरे सामने नहीं की। अगर कोई मेरे काम की तुलना उनके साथ करे, तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा। वैसे भी, मैं किसी की कॉपी बनना कतई पसंद नहीं करता। न ही मुझे रितिक या किसी दूसरे का क्लोन कहलाना पसंद है।
आपकी नजरों में रितिक/
ग्लैमर इंडस्ट्री का ऐसा चमकता सितारा है, जो एक्टिंग के साथ-साथ डांस और एक्शन का जादूगर है।
आपके डांस की तुलना भी रितिक के साथ की जाती है/
अगर लव स्टोरी 2050 को छोड़ दिया जाए, तो मुझे किसी दूसरी फिल्म में अपना डांस टैलंट दिखाने का मौका नहीं मिला। रितिक के साथ जब मेरे डांस की तुलना होती है, तो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं रितिक जैसा बेहतरीन डांसर हूं।
फिल्म की रिलीज से पहले बिपाशा के साथ शादी की खबरें कहीं पब्लिसिटी का फंडा तो नहीं /
आपके माध्यम से मैं अपने फैंस और गॉसिप कॉलम लिखने वालों को भी साफ कर दूं कि बिपाशा और मैं एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं। फिलहाल, बिपाशा से शादी की डेट अभी फाइनल नहीं है। यह काम हमारे बड़ों को करना है। रही बात ऐसी खबरों से मेरी फिल्म की पब्लिसिटी की बात, तो साफ कर दूं मैं ऐसी घटिया बातों में यकीन ही नहीं रखता। अब तक मैंने महसूस किया कि बिपाशा अपनी पर्सनल लाइफ में बहुत ही कैलकुलेटिव हैं। उसके लिए सफलता बहुत मायने रखती है, लेकिन इस बार बिपाशा ने अपनी इस कैलकुलेशन को पूरी तरह साइड कर दिया है।
बिपाशा के बारे में आपका कोई खास कमेंट/
मेरी नजरों में बिपाशा बेहद सिंपल हैं। उन्हें दूसरों की मदद करना, बहुत अच्छा लगता है। कई बार मुझे लगता है कि बेहद लंबी चली रिलेशनशिप के बाद अचानक ब्रेकअप के बाद से बिपाशा कुछ इनसिक्योर भी हो गई हैं। 'ढ़िश्कियाउं' में मेरा एक हॉट सीन था। इस सीन को लेकर जब बिपाशा ने नाराजगी दिखाई, तो डायरेक्टर की सलाह के बाद शिल्पा ने इस सीन को कम कर दिया। हां, मुझे बिपाशा का यही अंदाज सबसे ज्यादा पसंद आया। अपनी बात को अपने अंदर दबाने की बजाय दूसरों के सामने रखना हर किसी के बूते की बात नहीं।

सलमान पर सोनम की नजर

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर का कहना है कि सलमान खान बहुत अट्रेक्टिव एक्टर है। सोनम ने 2007 में रिलीज फिल्म "सांवरिया" से अपने करियर की शुरूआत की थी। इस फिल्म में उन्होंने सलमान खान के साथ काम किया था। सोनम अब दूसरी बार सलमान के साथ सूरज बड़जात्या की फिल्म "प्रेम रतन धन पायो" में काम करने जा रही है। सोनम ने कहा, सलमान बेहद आकर्षक अभिनेता है। मैं उनके साथ काम करने को लेकर बेहद रोमांचित हूं। एक्ट्रेस ने कहा, आपको इस फिल्म में डबल धमाल देखने को मिलेगा क्योंकि इस फिल्म में सलमान की दोहरी भूमिका है। अभी मैं इस फिल्म के बारे में अधिक नही बता सकती हूं। उल्लेखनीय है कि "प्रेम रतन धन पायो" में सलमान खान और सोनम कपूर के अलावा नील नीतीश मुकेश, अनुपम खेर, स्वरा भास्कर की भी मुख्य भूमिकाएं है। फिल्म की शूटिंग मई-जून से शुरू हो सकती है। फिल्म अगले साल दीवाली के अवसर पर रिलीज होगी।

राजनीति में ग्लैमर

एक ओर सोनिया गांधी, मायावती, सुषमा स्वराज, ममता बनर्जी जैसे चेहरे हैं, जिन्होंने जनता के बीच रहकर काम करते हुए राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं दूसरी ओर गुल पनाग, किरण खेर, मुनमुन सेन, नगमा, जयाप्रदा और हेमा मालिनी जैसे नाम हैं, जिनकी योग्यता यही है कि वे फिल्म जगत से हैं और अपनी सितारा छवि को चुनावों में भुनाना चाहती हैं। इनमें से कुछ चेहरों को छोड़कर बाकी अपनी खुद की सीट पर प्रभावी प्रचार करने लायक नहीं हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और फिल्म अभिनेत्री नगमा के साथ रोड शो के दौरान हुए दुर्व्यवहार के चलते लोकतंत्र में ग्लैमर की दुनिया से जुड़े लोगों खासकर महिला सितारों की भूमिका को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। देखा जाए तो इन चुनावों में लोगों को आकर्षित के लिए राजनीतिक दलों में खूबसूरत चेहरों को सामने लाने की होड़ मची है। अधिकांश राजनीतिक दल ग्लैमर जगत के सितारों को अपनी टिकट पर लोकसभा में लाने और चुनाव प्रचार में उनका इस्तेमाल करने में लगे हैं। इस होड़ में यह बात गौण हो गई है कि संसद कोई मनोरंजन का रंगमंच नहीं, बल्कि वह पवित्र स्थान है जहां निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की सेवा करते हुए देश को सही दिशा देने का काम करते हैं। यह हमारे लोकतंत्र की विडंबना है कि राजनीतिक दल अब ग्लैमर जगत के खूबसूरत चेहरों के सहारे अपनी चुनावी नैया पार लगाना चाहते हैं। एक ओर हमारी राष्ट्रीय राजनीति में सोनिया गांधी, मायावती, सुषमा स्वराज, ममता बनर्जी जैसे चेहरे हैं, जिन्होंने जनता के बीच रहकर काम करते हुए राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। यही कारण है कि राजनीति के गलियारों में देशहित के नजरिए से उनकी पहचान एक खुशनुमा एहसास कराती रही है। वहीं दूसरी ओर गुल पनाग, किरण खेर, मुनमुन सेन, नगमा, जयाप्रदा और हेमा मालिनी जैसे नाम हैं, जिनकी योग्यता यही है कि वे फिल्म जगत से हैं और अपनी सितारा छवि को चुनावों में भुनाना चाहती हैं। इनमें से कुछ चेहरों को छोड़कर बाकी अपनी खुद की सीट पर प्रभावी प्रचार करने लायक नहीं हैं। ऐसे चेहरों से पूछा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय स्तर पर दबे-कुचले, पिछड़े, आदिवासी, वनवासी, अल्पसंख्यक, दियारा क्षेत्रों में मंहगाई और दूसरी गंभीर समस्याओं से कराह रहे जनजीवन का स्तर सुधारने के लिए उनके पास क्या योजनाए हैं? महानगरीय सभ्यता के अलावा छोटे शहरों और गांवों के विकास के लिए उनकी क्या सोच है? इन क्षेत्रों में महिलाओं को उनका हक और खुशहाल जीवन देने के लिए वे कितना योगदान दे सकेंगी? यूं राजनीति में सौंदर्य तारिकाओं का आना कोई नई बात नहीं है। इसकी शुरुआत दक्षिण भारत से हुई थी, जहां तमिलनाडु में जयललिता फिल्मी दुनिया को छोड़ राजनीति में आईं और सत्ता के शिखर तक पहुंचीं। हालांकि फिल्म लाइन से आकर राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाने के मामले में जयललिता अभी भी एक अपवाद हैं। बहरहाल, यह सोचना बेमतलब लगता है कि जाति, धर्म और क्षेत्रवाद के माहौल में इन सुंदरियों की अपील पर मतदाता अपनी सोच को बदलते हुए किसी दूसरे को वोट दे देता है। यहां कुछ बातें और भी दिखतीं हैं। इन चुनिंदा हस्तियों को टिकट देकर और प्रचारक बनाकर चुनाव में प्रचार कराने में काफी फर्क हैं। प्रचारक के रूप में अभिनेता/अभिनेत्रियों को पार्टियों की ओर से मेहनताने के तौर पर दी गई धनराशि और दूसरी सुविधाएं इतनी अधिक हो जाती हैं कि उम्मीदवारों के चुनाव आयोग की जद में आ जाने का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर उन्हें पार्टी में सदस्य के रूप में शामिल कर लेने के बाद वह खतरा और उनके कारण उठने वाले कई दूसरे विवाद खुद ही खत्म हो जाते हैं। पर ग्लैमर जगत से राजनीति में आई इन हस्तियों के संदर्भ में हमें यह भी देखना होगा कि चुनावी जनसभाओं में भीड़ जुटाना और उसे वोटों में तब्दील करना दो बिलकुल जुदा बातें हैं। याद करें देश के सबसे दिलचस्प और लोकप्रिय राजनेताओं में से एक लालू प्रसाद यादव की बिहार और उसके पड़ोसी राज्यों में होने वाली रैलियों को। लालू की मसखरीपूर्ण शैली की वजह से रैलियों में उन्हें देखने-सुनने के लिए बड़े पैमाने पर भीड़ एकत्र होती है। लेकिन लालू भारी भीड़ के एक छोटे हिस्से को भी वोटों में बदलने के मामले में अक्सर असफल रहते हैं। ऐसा ही कुछ ग्लैमर जगत के सितारों के मामले में भी है। लाखों लोगों की भीड़ वाली जनसभाओं में भी देश के भविष्य को लेकर राजनेताओं के भाषण सुनने की अपेक्षा इन अभिनेताओं/अभिनेत्रियों को देखने की ललक ज्यादा होती है। इतना ही नहीं, राजनीति में आने वाले सितारों में ज्यादातर वे ही होते हैं, जिनको ग्लैमर की दुनिया में कड़े संघर्ष के चलते काम मिलना कम हो जाता है। उनका पेशा ढलान पर होता है अथवा पहले से चले आ रहे पेशे से मन उचट गया होता है। इनके राजनीति में आने पर किसी को एतराज नहीं। पर लोगों को इनके सितारा आकर्षण से इतर यह देखना चाहिए कि ये जनता की समस्याओं के प्रति कितने संवेदनशील हैं और इनमें राजनीतिक क्षेत्र में काम करने की कितनी योग्यता और जज्बा है।

बड़े पर्दे पर इश्क फरमाएंगे सलमान-जूही

बॉलीवुड की चुलबुली अभिनेत्री जूही चावला जल्द ही बड़े पर्दे पर सलमान खान के साथ इश्क फरमाती दिखाई देंगी। अब तक के अपने सफल फिल्मी कॅरियर में इस अभिनेत्री ने शाहरुख, आमिर जैसे सभी बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया है लेकिन सलमान के साथ कभी जोड़ी नहीं बना पाई। हाल ही में छोटे पर्दे के लोकप्रिय चैट शो 'कॉफी विद करण' में जूही ने सलमान के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की थी। उनकी यह इच्छा पूरी भी हो गई है। जूही-सलमान की जोड़ी जल्द एक अनाम फिल्म में दिखाई देगी जिसकी शूटिंग अगले साल शुरू होगी। फिल्म 'गुलाब गैंग' से जूही ने बॉलीवुड में धमाकेदार वापसी की है। अब उन्हें बड़े पर्दे पर सलमान के साथ इश्क फरमाते देखना वाकई दिलचस्प होगा।

vinod upadhyay विनोद उपाध्याय

vinod upadhyay विनोद उपाध्याय

गुरुवार, 20 मार्च 2014

सनी लियोनी का 'कैरेक्टर' नहीं; एक्टिंग देखिए!

भोपाल। भारतीय मूल की कनाडाई एक्ट्रेस सनी लियोनी रागिनी MMS-2 के प्रमोशन के लिए गुरुवार को भोपाल में थीं। वे जब सुबह मुंबई से भोपाल पहुंचीं, तब उनका पहनावा पश्चिमी था। लेकिन जब वे दोपहर में मीडिया और अपने प्रशंसकों से मुखातिब हुईं, तब वे भारतीय वस्त्रों में थीं। सुबह उन्होंने जींस, जैकेट और कैप पहना हुआ था, जबकि दोपहर में वे पंजाबी सलवार-शूट में डीबी सिटी स्थित फन सिनेमा पहुंचीं। दरअसल, यह लुक प्रमोशन की डिमांड थी। सनी ने यहां रागिनी MMS-2 के लोकप्रिय सांग 'बेबी डॉल' पर डांस किया। कुमार के लिखे इस गीत के बोल पंजाबी हैं। यह और बात है कि फिल्म में इस गीत पर सनी ने बोल्ड डांस किया है, जबकि यहां उन्होंने सादगी और संयमपूर्ण तरीके से ठुमके लगाए। सनी मूलत: पंजाबी हैं और उन्हें यह पहनावा अत्यंत भाता है।
32 वर्षीय करनजीत कौर वोहरा उर्फ सनी लियोनी कहती हैं कि आपको अमेरिका और इंडिया में मेरी इमेज एकदम अलग नजर आएगी। वे दो टूक कहती हैं 'आप मेरी पुरानी छवि पर मत जाइए। जिस्म-2 और रागिनी MMS-2 में बोल्ड सीन्स कैरेक्टर की डिमांड थे। आप उस कैरेक्टर के साथ मेरी एक्टिंग भी देखिए'। 5 फीट और 4 इंच हाइट की सनी कहती हैं कि मैं हर तरह के कैरेक्टर करना चाहती हूं। अगली फिल्मों में आप मुझे एकदम नये अंदाज में देखेंगे। वे देवांग ढोलकिया की फिल्म 'टीना एंड लोलो' के बारे में बता रही थीं। सनी ने इस फिल्म में एक्शन सीन्स किए हैं। वे बताती हैं- इस फिल्म के लिए मैंने मार्शल आर्ट भी सीखा। यह फिल्म इसी जनवरी को रिलीज होनी थी, लेकिन इसकी तारीख अपरिहार्य कारणों से आगे बढ़ानी पड़ी है।
चाय में कुछ ज्यादा ही शक्कर की शौकीन सनी
सनी लियोनी हमेशा मीठा बोलने और मुस्कराने में बिलीव करती हैं। उन्होंने कहा कि 'जिंदगी को फुलऑन जीना चाहिए, क्योंकि जिंदगी मिलेगी न दुबारा'। जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था पेटा से जुड़ी रहीं सनी कहती हैं- किसी के चेहरे पर हंसी लाना बेहद मुश्किल है, रुलाना आसान। मेरा मानना है कि, आप अपने काम, अपने व्यवहार से सबको खुशियां बांटते रहिए। यही जिंदगी है।
वे अपने विरोधियों को जवाब देती हैं:
जिन्हें मेरी फिल्में देखना हैं, देखें; नहीं देखना हैं, तो न देखें। लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगी कि आप ऐसा विरोध न करिए, जिससे लोगों को परेशानी हो, नुकसान हो। सनी वर्ष-2011 में बिग बॉस में हुई अपनी एंट्री को टर्निंग प्वाइंट मानती हैं। वे कहती हैं-बिग बॉस में आने के बाद ही महेश भट्ट ने मुझे 'जिस्म-2' में चांस दिया। प्रियंका चोपड़ा और एकता कपूर को अपना आदर्श मानने वालीं सनी के मुताबिक, दोनों बहुत प्रोफेशनल हैं, अपना काम बेहतर करती हैं। बॉलीवुड की खान-तिकड़ी सलमान, शाहरुख और आमिर के संग फिल्में करने की इच्छुक सनी कहती हैं, सबसे पहले मैं आमिर के संग फिल्म करना चाहूंगी। सनी के संग साये की तरह मौजूद रहे पति डेनियल वेबर उन पर गर्व महसूस करते हैं। वे सनी की अच्छाइयां गिनाते हैं-सनी एक अच्छी पत्नी, अच्छी दोस्त और अपने काम के प्रति समर्पित महिला है। उसने अपनी वर्सेटाइल पर्सनालिटी को भी साबित करके दिखाया है। डेनियल सनी को चिढ़ाने के अंदाज में कहते हैं-हां, इसमें एक खराब आदत है। यह घर की लाइट जलाकर उन्हें बंद करना भूल जाती है।

मंगलवार, 18 मार्च 2014

विराट ने किया अनुष्का को खफा

श्रीलंका। बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा श्रीलंका में अपनी अपकमिंग फिल्म "बॉम्बे वेलवेट" की शुटिंग में बिजी हैं। शुटिंग के दौरान अनुष्का के ब्वॉय फ्रेंड क्रिकेटर विराट कोहली उन्हें सरप्राइज देने के लिए कोलंबो पहुंचे। कोहली को सेट पर देख अनुष्का की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन उनकी ये खुशी उस वक्त काफूर हो गई जब उन्हें पता चला कि कोहली जिस फ्लाइट से मुंबई वापस गए उसमें कुछ पत्रकार भी मौजूद थे। दरअसल "बॉम्बे वेलवेट" के सेट पर पहुंचे कुछ पत्रकार कोलंबो से मुंबई जा रहे थे और विराट भी उसी फ्लाइट में सवार थे। जब ये बात अनुष्का को पता चली तो वे परेशान हो गई। खबर हैं कि इस बात से अनुष्का भड़क गई और उनकी सारी खुशी गायब हो गई। आपको बता दें कि विराट ने अपनी गर्लफ्रेंड अनुष्का की फिल्म "बॉम्बे वेलवेट" के सेट पर जाने में कभी गुरेज नहीं किया। विराट तो विकास बहल की फिल्म "क्वीन" की सक्सेस में काटे गए केक पार्टी का भी हिस्सा बने। विराट और अनुष्का श्रीलंका में तो खुले आम इश्क फरमाते नजर आ रहे हैं, लेकिन अब देखना ये हैं कि इंडिया में कब ये दोनों अपने इश्क को कबूल करते हैं।

काजोल को नहीं पसंद अरमान?

मुंबई। बॉलीवुड की बबली एक्ट्रेस काजोल अपनी छोटी बहन तनीषा की पसंद अरमान से ज्यादा खुश नजर नहीं आ रही हैं। काजोल और उनकी मां तनुजा को तनीषा और अरमान का रिश्ता पहले दिन से ही पसंद नहीं था। लेकिन ये कपल किसी की सुनने को राजी नहीं हैं। तनीषा और अरमान को कई बार खुले आम साथ में घूमते देखा गया हैं। लेकिन काजोल अरमान से खुश नहीं लग रही हैं। हाल ही में करण जौहर के शो में आई काजोल से जब उनके बेस्ट फ्रेंड करण ने तनीषा और अरमान के रिश्ते और अरमान को अपनी फैमिली में वेलकम करने के बारे में पूछा तो काजोल ने कहा कि हम उसके बारे में सोचेंगे। इस बात को किसी और दिन के लिए छोड़ देते हैं। ये कहकर काजोल ने बहुत समझदारी से बात को टाल दिया, लेकिन इससे काजोल की नाराजगी साफ जाहिर होती हैं। वहीं जब तनीषा से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने ने भी इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। खबर हैं कि तनीषा और अरमान ने सगाई कर ली है और जल्द ही शादी करने वाले हैं। तनीषा अपनी मां तनुजा का दिल जीतने में कामयाब रही हैं। तनुजा को पहले अरमान बिल्कुल पसंद नहीं थे लेकिन अब वे अरमान के साथ थोड़ी नरम नजर आ रही हैं। लेकिन काजोल शायद अभी तक अरमान को नहीं अपना पाई हैं। तभी तो वे अरमान के बारे में कोई बात नहीं करना चाहती हैं।

सड़कों पर धूमधड़ाम... भूल गए अपना नाम

भोपाल। बुराइयों को दहन करने के बाद सोमवार को सारा शहर एक रंग में रंगा-पुता नजर आया! कौन अपना और कौन पराया; होली के रंगों ने सबको एक-रंग में ढाल दिया था। शहर में होली पर चारों तरफ खुशी का माहौल था। सुबह से ही विशेषकर बच्चों में होली का उल्लास देखा गया। हुरियारों की टोलियां पूरे शहर में घूमीं। नए और पुराने शहर में होली के पारंपरिक जुलूस भी निकले, जिनके लिए नगर निगम ने रास्ते में पानी के विशेष इंतजाम किए थे। सुबह से ही नए शहर की कॉलोनियों में होली का माहौल दिखाई दिया। कोलार रोड की कॉलोनियां हों या गुलमोहर, त्रिलंगा क्षेत्र या फिर रचना नगर गौतम नगर, अवधपुरी का इलाका, सभी कॉलोनियों में बुजुर्ग, बच्चे और लड़कियां अलग-अलग अंदाज में होली खेलने निकल पड़े। बुजुर्ग जहां समूह बनाकर पड़ोसियों के यहां होली मिलने निकले तो बच्चे पिचकारियां और पानी से भरे गुब्बारे लेकर टोली बनाकर खेलते रहे। लड़कियों की होली भी समूह में दिखाई दी, जो बाल्टियां भरकर उनमें पानी और रंग मिलाकर एक-दूसरे पर उड़ेलती दिखाई दीं। पुराने शहर में भी कमोबेश यही माहौल रहा। दिन में भीड़भाड़ से भरे रहने वाला चौक, जुमेराती, घोड़ानक्कास, आजाद मार्केट जैसे क्षेत्र की सड़कें सुबह से ही रंग से भरी बाल्टियों और पिचकारियों की बौछारों से गीली हो चुकी थीं। शाहजहांनाबाद, बरखेड़ी, जहांगीराबाद जैसे क्षेत्रों में कुछ युवक कीचड़ से भी होली खेलते दिखाई दिए। मौसम ने भी हुरियारों का पूरा साथ दिया। राजधानी में सोमवार दोपहर तक न्यूनतम तापमान 21 डिग्री और अधिकतम 36 डिग्री के आसपास रहा। लिहाजा थोड़ी बढ़ती गर्मी ने पानी में भीगने का आनंद और दोगुना कर दिया। शहर के सभी चौराहों, गली-मोहल्लों में सुबह से ही हुरियारों की टोलियां नजर आने लगी थीं। पुराने शहर में शाहजहांनाबाद, नारियलखेड़ा, टीला जमालपुरा, करोंद, जुमेराती, घोड़ानक्कास, मंगलवारा, बुधवारा, छावनी, बरखेड़ी, जिंसी के अलावा रायसेन रोड स्थित गोविंदपुरा, जेके रोड, अयोध्या नगर, आनंद नगर, पिपलानी, अवधपुरी और नए शहर में जवाहर चौक, नेहरू नगर, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, माता मंदिर,चूना भट्टी आदि तमाम इलाकों में हुरियारों की टोलियां घूमतीं नजर आईं।
पुराने शहर में निकला जुलूस
हिंदू उत्सव समिति द्वारा पुराने शहर में होली का विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में हुरियारे शामिल हुए। पुराने शहर की गलियों से होता हुआ जुलूस जैसे ही सोमवार दुर्गा मंदिर के पास पहुंचा, नगर निगम के टैंकरों से पानी की बौछारों से उसका स्वागत किया गया। पुराने शहर के दयानंद चौक से जुलूस शुरू हुआ, जिसमें हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह सहित समिति के कई पदाधिकारी मौजूद थे। जुलूस में ऊंट भी शामिल थे। ढोल-ढमाकों के साथ निकले इस जुलूस में शामिल लोग थैलियों में भरकर लाए गुलाल उड़ाते हुए चल रहे थे। कई रंगों के गुलाल उड़ाए जाने से जुलूस जहां-जहां से गुजर रहा था, सड़कों पर रंगों की चादर बिछती जा रही थी। जुलूस दयानंद चौक से शुरू होकर लोहा बाजार, चौक, लखेरापुरा, सोमवारा, सिंधी मार्केट होता हुआ जवाहर चौक जुमेराती पहुंचा। इस बीच सोमवारा में कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी पीसी शर्मा भी जुलूस में शामिल हो गए।

रविवार, 9 मार्च 2014

गुलाब गैंग

कलाकार : माधुरी दीक्षित, जूही चावला
निर्देशक : सौमिक सेन
बेधड़क सीमाओं को तोड़ती और नए सितारों को छूती गंवई महिलाओं के अधिकार और समस्याओं की 'गुलाब गैंग' माधुरी दीक्षित और जूही चावला की अदाकारी और भिड़ंत के लिए भी देखी जा सकती है। रज्जो को पढ़ने का शौक है। उसकी सौतेली मां पढ़ाई की उसकी जिद को नहीं समझ पाती। वह उसे घरेलू कामों में झोंकना चाहती है। यही रज्जो बड़ी होकर शिक्षा को मिशन बना लेती है। वह गुलाब गैंग आश्रम की स्थापना करती है। यहां तक कि स्थानीय राजनीतिज्ञ सुमित्रा देवी की निगाहों में आ जाती है। सुमित्रा देवी की अपनी ताकत बढ़ाने के लिए रज्जो को साथ आने का ऑफर देती है, लेकिन रज्जो सामने आना बेहतर समझती है। यहां से दोनों की भिड़ंत आरंभ होती है। लेखक-निर्देशक और संगीतकार सौमिक सेन की त्रिआयामी प्रतिभा में संगीतकार फिल्म पर ज्यादा हावी रहा है। संगीत का सुंदर उपयोग है, लेकिन फिल्म के मसालेदार संरचना में वह योग नहीं करता। संगीत और नृत्य पृथक रूप से उत्तम होने के बावजूद फिल्म की गति को धीमी करता है। माधुरी दीक्षित ने रज्जो और जूही चावला ने सुमित्रा देवी के किरदार को सही रंग दिया है। रज्जो के जोश को माधुरी दीक्षित पर्दे पर ले आती हैं। वहीं साजिश रचती सुमित्रा देवी की चालाकी को जूही चावला सटीक अंदाज देती है। दोनो जब-जब एक फ्रेम में आई है, उन्होंने दृश्यों को प्रभावशाली बना दिया है। सौमिक सेन ने फिल्मों में गैंग की गतिविधियों को तरजीह दी है। सामूहिकता पर बल देने के कारण वे हिंदी फिल्मों की परिपाटी से बाहर निकल जाते हैं। अगर रज्जो की केंद्रीयता को परिभाषित किया जाता तो फिल्म अधिक प्रभावशाली हो जाती। फिल्म के दृश्य संयोजन और विषय में हल्का बिखराव है।

माधुरी में खुद को देख पाईं संपत

बुंदेलखंड में महिलाओं के निगरानी समूह 'गुलाबी गैंग' की संस्थापक संपत पाल 'गुलाब गैंग' फिल्म के निर्माताओं से भले नाराज हो सकती हैं लेकिन फिल्म में माधुरी दीक्षित की भूमिका में वह खुद की जिदंगी की झलक पाती हैं। संपत का मानना है कि इस चरित्र ने पर्दे पर उनके होने का एहसास कराया है। संपत ने कहा 'हालांकि फिल्म को लेकर उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। मैं मांग पूरी होने तक इसे जारी रखूंगी लेकिन फिल्म में माधुरी ने निश्चित रूप से जबर्दस्त अदाकारी से मुझे प्रभावित किया है।' उन्होंने आगे कहा 'मैं अपनी जिंदगी में जिस दौर से गुजर चुकी हूं, माधुरी की अदाकारी ने उन यादों को फिर ताजा कर दिया है।' पाल ने साफ किया कि उनकी नाराजगी अभिनेत्रियों से नहीं है बल्कि वह अनुभव सिन्हा सहित फिल्म के निर्माताओं के खिलाफ हैं। इस मामले को अदालत में लेकर पहुंची पाल का दावा है कि फिल्म के निर्माण के पहले उनकी इजाजत नहीं ली गई थी।